शांति जिनेश्वर सोलमा, अचिरा सुत वंदो;विश्वसेन कुल नभोमणी, भविजन सुख कंदो।मृग लांछन जिन आयुखूं, लाख वरस प्रमाण;हत्थिनापुर नगरी धणी, प्रभुजी गुण मणिखाण।
सामान्य चैत्यवंदन एक बार किया जाता है, लेकिन का अर्थ है—पालीताणा की पहाड़ी पर पाँच प्रमुख स्थानों (टेकरियों) पर जाकर विधिपूर्वक चैत्यवंदन करना। ये पाँच स्थान हैं:
प्रत्येक चैत्यवंदन शुरू करने से पहले आराधक को बोलना चाहिए और फिर भगवान के सामने तीन उंगलियों से स्वास्तिक (साथिया) बनाना चाहिए। इसके बाद एकाग्रचित्त होकर नवकार मंत्र या लोगस्स सूत्र का काउसग्ग (ध्यान) किया जाता है। palitana 5 chaityavandan in hindi full
गिरिराज की चढ़ाई शुरू करने से पहले पर्वत की तलहटी (तळेटी) पर यह पहला चैत्यवंदन किया जाता है। यहाँ तीर्थ के अधिष्ठायक देवों और पूरे पर्वत को नमन किया जाता है।
उस स्थान से संबंधित कोई भी मधुर (भजन) गुनगुनाएं। शांति जिनेश्वर सोलमा
अनंत सिद्धों का यह स्थान, सकल तीर्थ का राय;
मुख्य प्रवेश द्वार, पर्वत की तलहटी। हिंदी पाठ: अचिरा सुत वंदो
पर्वत के ऊपर मुख्य परिसर में प्रवेश करते समय शांतिनाथ भगवान के मंदिर में यह चैत्यवंदन किया जाता है。 स्थान:
"आदीश्वर जिनराय के, गणधर गुणवंत;